Tuesday, March 19, 2019

JNU के लापता छात्र ‘नजीब अहमद की वायरल तस्वीर’ का सच

सोशल मीडिया पर कुछ हथियारबंद लड़ाकों की एक तस्वीर इस दावे के साथ शेयर की जा रही है कि इन लड़ाकों के बीच में बैठा शख़्स जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय का लापता छात्र नजीब अहमद है.

जिन लोगों ने ये तस्वीर शेयर की है, उनका कहना है कि जेएनयू के छात्र नजीब अहमद तथाकथित चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट में शामिल हो गए हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जब #MainBhiChowkidar नाम के सोशल मीडिया कैंपेन की शुरुआत की थी तो पीएम मोदी से सबसे तीखा सवाल जेएनयू से लापता हुए छात्र नजीब अहमद की मां फ़ातिमा नफ़ीस ने ही पूछा था.

उन्होंने ट्वीट कर पीएम मोदी से पूछा, "अगर आप चौकीदार हैं तो मेरा बेटा कहां है. एबीवीपी के आरोपी गिरफ़्तार क्यों नहीं किये जा रहे हैं. मेरे बेटे की तलाश में देश की तीन टॉप एजेंसी विफल क्यों हो गई हैं?"

उनके इस ट्वीट के ख़बरों में आने के बाद दक्षिणपंथी रुझान वाले फ़ेसबुक ग्रुप्स में, शेयर चैट और व्हॉट्सऐप पर एक पुरानी तस्वीर बहुत तेज़ी से शेयर की गई है जिसमें नजीब के होने का दावा किया जा रहा है.

यह वायरल तस्वीर साल 2018 की शुरुआत में भी इसी दावे के साथ शेयर की गई थी.

बीबीसी के कई पाठकों ने भी व्हॉट्सऐप के ज़रिए 'फ़ैक्ट चेक टीम' को यह तस्वीर और इससे जुड़ा एक संदेश भेजा है.

अपनी पड़ताल में हमने पाया है कि ये तस्वीर जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद की नहीं हो सकती.

सरसरी तौर पर देखें तो नजीब अहमद और वायरल तस्वीर में दिखने वाले शख़्स के चेहरे में बमुश्किल कोई समानताएं हैं.

लेकिन वायरल तस्वीर से जुड़े तथ्य नजीब अहमद के इस तस्वीर में होने के सभी दावों को सिरे से ख़ारिज कर देते हैं.

नजीब अहमद 14 अक्तूबर 2016 की रात में जेएनयू के हॉस्टल से लापता हुए थे. जबकि वायरल तस्वीर 7 मार्च 2015 की है.

यह तस्वीर इराक़ के अल-अलम शहर से सटे ताल कसीबा नामक कस्बे में खींची गई थी.

यह तस्वीर अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के फ़ोटोग्राफ़र ताहिर अल-सूडानी ने खींची थी.

समाचार एजेंसी के मुताबिक़ तस्वीर में दिख रहे हथियारबंद लोग इस्लामिक स्टेट के लड़ाके नहीं, बल्कि इराक़ सिक्योरिटी फ़ोर्स की मदद करने वाले शिया लड़ाके हैं.

जिस दिन यह तस्वीर खींची गई थी, उसी दिन इराक़ी सिक्योरिटी फ़ोर्स ने इस्लामिक स्टेट के नियंत्रण वाले तिकरित शहर में जारी एक बड़े अभियान में जीत हासिल की थी और उसे अपने क़ब्ज़े में ले लिया था.

2 अप्रैल 2015 को इराक़ी बलों ने यह आधिकारिक घोषणा की थी कि इराक़ के तिकरित शहर को आईएस के क़ब्ज़े से पूरी तरह मुक्त कर लिया गया है.

क़रीब दो साल चली खोजबीन और पड़ताल के बाद केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली के जेएनयू से लापता हुए छात्र नजीब अहमद का केस अक्तूबर 2018 में बंद कर दिया था.

उस समय नजीब की मां फ़ातिमा नफ़ीस ने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि वो अपनी लड़ाई जारी रखेंगी और ज़रूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाज़ा खटखटाएंगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ अधिकारियों का कहना था कि नजीब अहमद को खोजने की तमाम कोशिशों का कोई नतीजा नहीं निकलने के बाद सीबीआई ने केस बंद करने का फ़ैसला किया था.

नजीब 14 अक्तूबर 2016 से लापता हैं. 14 अक्टूबर की रात जेएनयू के माही मांडवी हॉस्टल में कुछ छात्रों के बीच झड़प हुई थी. इसके बाद नजीब का कहीं पता नहीं चला.

Tuesday, March 12, 2019

韩国朝鲜分裂:三八线划出语言鸿沟

取道中国,跋山涉水,朝鲜人冒着生命危险脱北。总算到了韩国,开始新生活面对许多许多新挑战,其中之一是:语言交流。

不少脱北者发现,很多韩国词他们根本听不懂,比如税收、无家可归、租金。对习惯了一切属于国家的朝鲜人来说,这些都是天方夜谭的概念。

半岛分裂半个多世纪,三八线两边的语言也有了很大的差别。

自从二战让半岛一分为二后,朝鲜长期封闭,与世隔绝,语言基本没有变化。同期,伴随着技术上日新月异,文化上和外部互动交流,韩国语言发生了巨大的变化。

面对语言障碍带来的歧视和不便,脱北者开始寻找新手段帮忙。比如,翻译应用软件。同时,韩国也在编纂大部头的统一字典。

抵达韩国,脱北者因为口音不同已经明显感觉是外人,同时他们还必须尽快掌握许多陌生的词汇。

过去几十年,韩语出现了好多“韩氏英语”词汇——受美语影响创造的新词,也直接接纳了好多英语单词,比如果汁、香波、甜圈等等,都是使用英语单词的音译。

但是,相对现代的这些词在朝鲜语中用的是形象描述,比如香波,朝鲜语称之为“洗头发的肥皂水”,甜圈被称为“圈状面包”,至于果汁,则是“甜水”。

朝鲜也从俄国盟友那里借用了许多词,比如“拖拉机”。原本韩朝通用的一个词“朋友”,在朝鲜被赋予受苏联影响的“同志”意思,之后在韩语中消失了。

韩国人和朝鲜人不同的归属感也让政治性词汇的含义产生了相当大的分歧。比如,朝鲜半岛、朝鲜战争等词,双方均有不同表述方式。

语言障碍甚至冲击了体育圈。2018年冬奥会上,韩国、朝鲜联合组队,但是双方队员所用的词汇差别却很大。

比如,韩语、朝鲜语中对守门员的叫法不同,韩语几乎是英文goalkeeper的音译,意思更接近“守球员”,而朝鲜语用的却是朝鲜语发音的“守门员”。

为了方便交流,联队球员预先准备了一本“字典”:把冰球词汇翻译成韩朝队员都能理解版本的小册子。

到了韩国,脱北者需要面对的是一个和朝鲜有着天壤之别的社会体制。

来之前,他们从平壤官方媒体中获得的对韩国的了解可能非常有限,除了对韩国领导人的讽刺和侮辱。

比如,平壤官媒曾经长期把韩国称为(美国)“走狗”,还给韩国数名前总统起了贬义外号。

美国总统也没能逃脱,比如奥巴马就被称作“花架子”(大意)。

一些朝鲜人确实通过观看黑市走私进来的媒体材料,对韩国有一定的认识。但是,交流仍然是融入的最大障碍之一。

帮助脱北者解决语言交流困难的努力,始于他们在韩国展开新生活的第一步:哈纳文。这是韩国为脱北者开办、新脱北者必须参加的安置和培训中心。

哈纳文为期三个月,目的主要是给脱北者提供必要的知识和手段。

为了帮助脱北者适应,韩国统一部还定期发布小册子,收录那些容易引起误会、误解的常用词汇。

一些非政府组织,比如“教朝鲜难民”,也为新脱北者办班,教授他们融入韩国社会必须掌握的英语词汇。

还有手机应用软体、其他教育性材料等也不断涌出。比如Univoca(大意是统一词汇)就是一款应用软件,可把韩国的日常用语翻译成朝鲜人更熟悉的用法。

另外,韩朝双方还于2015年启动“民族语言大辞典韩朝共同编纂项目”。该项目工程浩大,目的是统一半岛语言。

项目参与人、韩国语言学家韩永文(Han Yong-woon,音译)说,字典将收录目前韩国、朝鲜已有字典中的词条,还将增加新词汇和表达方法。

他告诉BBC,“我们计划搜集大约21万字,然后搜集已经通用但却不包括在已有字典当中的新词、新表述方法,大约10万条。”

不过,韩朝政治关系紧张期间此类计划曾被暂时搁置。但韩永文说,目前韩国方面已经完成了大约80%的工作,今后还需要大约五年的时间。至于朝鲜方面的进展情况,韩永文表示,这需要朝鲜自己来确认。

韩语/朝鲜语是世界上历史最为悠久的语言之一。现在通用的韩语/朝鲜语始于15世纪。

当时的统治者世宗大王决定,要为臣民创建字母表。圣旨如山倒,后来就发明出了“训民正音”,也就是韩国人所说的韩文文字(Hangul)、朝鲜人所说的朝鲜文字(Chosongul)。

Tuesday, March 5, 2019

रफ़ाल पर ग़लत जानकारियां फैला रहे हैं मोदीः पूर्व रक्षा मंत्री- आज की पांच बड़ी ख़बरें

रफ़ाल सौदे में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पलटवार करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार ने इसकी ख़रीद प्रक्रिया को देखने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट की उपेक्षा की है.

कांग्रेस की तरफ से पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी बीजेपी को प्रधानमंत्री के उस बयान का जवाब दे रहे थे जिसमें पीएम ने कहा था कि रफ़ाल सौदे में देरी के लिए कांग्रेस ज़िम्मेदार है.

पूर्व रक्षा मंत्री ने कहा बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह इस पर राजनीति कर रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी देश में घूम कर ग़लत जानकारियां फैला रहे हैं.

पूर्व रक्षामंत्री ने कहा कि कैग की रिपोर्ट से साफ़ है कि जब यूपीए सरकार आई तो हमने प्रक्रिया शुरू की.

उन्होंने कहा कि प्रक्रिया के दौरान बीजेपी के नेताओं यशवंत सिन्हा और सुब्रमण्यम स्वामी ने आपत्ति जताई थी.

एंटनी ने कहा, "इसके बाद एक समिति का गठन हुआ था. इस समिति की रिपोर्ट को नरेंद्र मोदी सरकार ने नजरअंदाज किया."

राम जन्मभूमि विवाद में मध्यस्थता पर कोर्ट का फ़ैसला
अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद को हिंदू-मुस्लिम पक्षों के बीच आपसी बातचीत से सुलझाने को लेकर बुधवार को फ़ैसला देगा. कोर्ट तय करेगा कि दोनों पक्षों के बीच सहमति से विवाद सुलझाने में मध्यस्थता कौन करेगा.

विवाद से जुड़े प्रमुख पक्षकारों में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड सहित लगभग सभी मुस्लिम पक्षकार और प्रमुख हिन्दू पक्षकारों में से निर्मोही अखाड़ा अदालत की मध्यस्थता में आपसी बातचीत से विवाद को हल करने के लिए राजी हो गए हैं.

अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद की सुनवाई कर रही पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 26 फरवरी को हिंदू-मुसलमान पक्षों के बीच मध्यस्थ के जरिये आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का प्रस्ताव दिया था.

कोर्ट ने कहा था कि अगर बातचीत के जरिये विवाद सुलझने की एक फीसद भी उम्मीद है तो कोशिश होनी चाहिए. कोर्ट ने अपने प्रस्ताव पर पक्षकारों की राय पूछी थी, जिसमें मुस्लिम पक्ष व निर्मोही अखाड़ा की ओर से सहमति जताई गई थी.

सपा-बसपा गठबंधन में शामिल हुआ रालोद, मिलीं तीन सीटें
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी-बहुजन समाज पार्टी गठबंधन में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) भी शामिल हो गया है. मंगलवार को इसकी औपचारिक घोषणा कर दी गई. साथ ही यह भी घोषणा की गई कि रालोद उत्तर प्रदेश में मथुरा, बागपत और मुजफ्फरनगर की लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ेगा.

इसकी घोषणा के दौरान रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए सपा-बसपा और कांग्रेस सहित कई पार्टियां गठबंधन में शामिल हो रही हैं. इस मौके पर उन्होंने कहा कि देश और संविधान को बचाने के लिए ज़रूरी है कि सभी पार्टियां एक साथ आएं.

13-पॉइंट रोस्टर पर अध्यादेश लाने की तैयारी में सरकार
13-पॉइंट रोस्टर पर मचे विवाद के बीच सरकार उच्च शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ केंद्र सरकार अध्यादेश लाएगी.

इसके तहत एससी, एसटी और ओबीसी को विश्वविद्यालयों में फ़ैकल्टी में भर्ती के लिए आरक्षण डिपार्टमेंट के बजाए यूनिवर्सिटी के आधार पर दिया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2017 के फ़ैसले को बहाल रखा था, जिसमें आरक्षित पदों को भरने के लिए डिपार्टमेंट को यूनिट माना गया था न कि यूनीवर्सिटी को.

इस मामले में सरकार की रिव्यू पीटिशन को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था.

इस अध्यादेश के बाद यूनिवर्सिटी या कॉलेज को एक यूनिट के तौर पर लिया जाएगा, जबकि विभिन्न श्रेणियों में पदों की गिनती करने में डिपार्टमेंट को आधार नहीं माना जाएगा.

तुर्की को नहीं मिलेगा अमरीकी एफ़-35
यूरोप में अमरीका के वरिष्ठ जनरल ने कहा है कि अमरीका नाटो सहयोगी तुर्की को अपना अत्याधुनिक लड़ाकू विमान लॉकहीड मार्टिन एफ35 नहीं बेचेगा. अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इससे संबंधित बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.

अमरीका का कहना है कि वह ये फैसला तब तक नहीं बदलेगा जब तक कि तुर्की रूस से आधुनिक एस-400 एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल लेने की योजना छोड़ नहीं देता.

तुर्की अमरीका से इस साल के मार्च कर एफ़-35 लड़ाकू विमान खरीदने वाला था, लेकिन अब वो इस साल के नवंबर तक ऐसा नहीं कर पाएगा.

इस साल के अंत तक तुर्की को रूस से एस400 मिसाइल की डिलिवरी होने की संभावना है. यह डिलिवरी उस 50 लाख डॉलर के सौदे का हिस्सा है जो तुर्की और रूस के बीच दो साल पहले हुआ था.