Monday, December 31, 2018

झारखंड: क्यों चर्चा में है विकलांगों का ये समूह

रामेश्वर महतो की दोनों आंखें नहीं हैं. उन्हें कुछ भी नहीं दिखता. दस साल के थे, तब खेलने के दौरान आंखों में चोट लगी.

पंद्रह साल के हुए, तो दिखना पूरी तरह बंद हो गया. अब उनकी उम्र 40 साल है. पत्नी और दो बेटियों के अलावा 70 साल के मां-बाप घर पर हैं. इन सबकी ज़िम्मेदारी उनके कंधे पर है.

आंखें नही होने के कारण उन्हें दिक़्क़त होती थी, लेकिन अब यही विकलांगता उनकी सफलता का रास्ता तैयार कर रही है.

वे ख़ूब काम कर रहे हैं और इससे उनकी कमाई भी बढ़ी है. वे बारीडीह में रहते हैं. यह रांची जिले के ओरमांझी प्रखंड का एक गांव है.

रामेश्वर महतो बिरसा विकलांग स्वयं सहायता समूह के अध्यक्ष हैं. इस समूह को हाल ही में जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन दुकान चलाने का लाइसेंस मिला है.

बारीडीह गांव के 10 विकलांगों का यह समूह अब अपने गांव के डेढ़ सौ से भी अधिक परिवारों को सरकारी राशन उपलब्ध कराता है.

बीबीसी से बातचीत में रामेश्वर महतो कहते हैं, "आंखें नहीं होने के कारण लोगों की ज़लालत झेलनी पड़ती थी. गांव के दूसरे विकलांग भी इसी भेदभाव के शिकार थे."

"तब हमलोगों ने अपनी तरह के और लोगों को साथ जोड़ा. गांव के दस लोग एकमत हुए और साल-2010 में हमने अपना समूह बना लिया."

"छह साल बाद हमारे समूह को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से मान्यता मिल गई और अब हमें राशन दुकान का लाइसेंस मिल गया है."

किसी की आंखें नहीं, कोई पैर से लाचार
रामेश्वर महतो, घुमेश्वर मुंडा और सुंदरलाल महतो की आंखें नहीं हैं. नारायण कुमार महतो पैर से लाचार हैं.

तेजनाथ महतो देख और चल तो सकते हैं लेकिन वे बोलने व सुनने में असमर्थ हैं.

तालकेश्वर मुंडा, फागु करमाली, पूरण महतो, नागेश्वर महतो और बलवंत कुमार भी शरीर के किसी न किसी अंग से लाचार हैं.

इसके बावजूद इनका समूह राशन दुकान संचालित कर रहा है. नारायण कुमार महतो बिरसा विकलांग सहायता समूह के सचिव हैं.

पोलियो के कारण बचपन में ही वे पैरों से लाचार हो गए.

पैदल चलने के लिए भले ही उन्हें सहारे की ज़रूरत हो, लेकिन स्कूटी से बनी ट्राईसाइकिल के सहारे वे राशन गोदाम तक चले जाते हैं.

नारायण महतो ने बीबीसी को बताया, "जिसकी आंखें नहीं हैं, वह आंख वाले की मदद से वज़न उठा लेता है."

"जिसके हाथ नहीं हैं, वह आंखों का इस्तेमाल कर राशन का वज़न कराता है. पैर से लाचार व्यक्ति हिसाब-किताब कर लेता है."

"तो कोई और ग्राहकों के अंगूठे का मिलान और उनसे पैसे लेने का काम करता है. इस तरह हमलोग एक-दूसरे की अपंगता को ख़ारिज कर अपना काम कर लेते हैं."

Thursday, December 27, 2018

सुपर 30 के आनंद कुमार के भाई प्रणव कुमार पर हमला हुआ या हादसा?

फ़िल्म प्रमोशन से जुड़ी चीज़ें बिहार में आनंद कुमार के भाई प्रणव कुमार संभाल रहे थे. लेकिन इन सब के बीच प्रणव कुमार एक 'सड़क हादसे' का शिकार होने के बाद अब यारपुर इलाके के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं.

आनंद कुमार ने बीबीसी हिंदी को बताया, "एक साज़िश के तहत मेरे भाई को हाइवा (ट्रक) से कुचलने की कोशिश की गई. बाइक से जा रहे प्रणव को हाइवा 12-14 फीट तक घसीटते हुए ले गया. ईश्वर की कृपा थी कि उसकी जान बच गई. वरना तो वो लोग मारने की सोच कर आए थे."

पटना के जक्कनपुर थाने में आनंद कुमार ने एफ़आईआर दर्ज करवाई है.

एफ़आईआर में दर्ज प्रणव के बयान के मुताबिक़, ''टक्कर के बाद ज़ख्मी हालत में जब उन्होंने भाग रहे हाइवा की तस्वीर लेनी चाही तो अचानक चार-पांच लड़कों ने उन्हें तस्वीर लेने से रोका. जैसे ही हाइवा नजरों से ओझल हुई, वो लड़के भी अचानक गायब हो गए."

पुलिस, डॉक्टरों ने क्या कहा?
डॉक्टरों के मुताबिक़, गंभीर रूप से ज़ख्मी प्रणव का दाहिना पैर बुरी तरह फ्रैक्चर है. हालांकि वो अब खतरे से बाहर हैं.

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. जक्कनपुर पुलिस के मुताबिक़, ''पहली नज़र में यह सड़क हादसे जैसा प्रतीत हो रहा है. लेकिन, एफआईआर में दिए अपने बयान में प्रणव ने विद्यानंद नाम के एक व्यक्ति का ज़िक्र करते हुए यह कहा है कि जिन लड़कों ने उन्हें फोटो खींचने से रोका था, उनमें से एक को वह पहचानते हैं जिसे उन्होंने कई बार विद्यानंद के साथ देखा है.''

विद्यानंद आनंद कुमार के कुम्हरार स्थित कोचिंग क्लास के सामने ही एक होस्टल चलाते हैं.

शुरुआत में सड़क दुर्घटना जैसा लग रहा मामला अब पुलिस के लिए पेचीदा बन गया है. पुलिस अब उस शख्स की तलाश में है, जिसका जिक्र एफ़आईआर में है.

जक्कनपुर थाना प्रभारी ने बताया, ''पहले हम लोग उस आदमी तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जिसके बारे में प्रणव ने कहा है. सारे पहलुओं पर जांच के बाद ही ये कहा जा सकता है कि ये रोड एक्सिडेंट नहीं था. फिलहाल यह मामला रोड एक्सिडेंट के रूप में दर्ज है.''

आनंद कुमार का क्या कहना है?
प्रणव पर ये कथित हमला ऐसे वक़्त में हुआ है, जब सुपर 30 बैच में पढ़ने वाले छात्रों की परीक्षा क़रीब है. दूसरा विकास बहल की बनाई फ़िल्म, जिसमें रितिक रोशन आनंद की भूमिका में हैं, जल्द रिलीज़ होने वाली है.

आनंद कहते हैं, "वही भाई ही तो मेरा संबल है. काम का तो छोड़ ही दीजिए, मानसिक रूप से भी आघात पहुंचा है. अभी तक लोगों को मुझसे दुश्मनी थी, मुझे टारगेट करते थे, अब भाई को निशाना बनाया जा रहा है. तीन महीने तक वह चल भी नहीं पाएगा. बच्चों के नोट्स तैयार करवाने से लेकर सारा कुछ तो वही करता है. अब पढ़ाने के सिवा और भी तमाम जिम्मेदारियां मुझे खुद उठानी होंगी."

आनंद इसे सड़क दुर्घटना मानने से साफ इंकार करते हैं.

वो कहते हैं, "सड़क दुर्घटना के समय आस-पास जो लोग मौजूद होते हैं वो ज़ख्मी की मदद करते हैं, मगर यहां भाई को तो पहले फोटो खींचने से रोक दिया और फिर जस का तस छोड़ कर भाग गए. ये सब कुछ एक साजिश के तहत हो रहा है. मैं नाम नहीं लूंगा. सब जानते हैं. पहले मेरे एक स्टाफ को फंसाया गया. वो दो महीने जेल में रहा. और अब वो यहां तक गिर गए कि हम लोगों पर व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं."

हमने जब प्रणव से बात की तो एक नई जानकारी मिली. वो ये कि जिस विद्यानंद का ज़िक्र एफ़आईआर में है, उसके खिलाफ पहले भी उन्होंने कई बार शिकायतें की हैं.

प्रणव ने आरोप लगाया, ''विद्यानंद पहले भी हमारे ख़िलाफ़ बोलते रहे हैं. भैया ने उससे ये सब नहीं करने का कई बार आग्रह किया था. हमने कई बार इसकी सूचना पुलिस को दी है. लेकिन मालूम नहीं पुलिस ने इसे लेकर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की"

Monday, December 17, 2018

डीएमके प्रमुख स्टालिन ने बढ़ाया प्रधानमंत्री के लिए राहुल का नाम, विपक्ष हैरान: प्रेस रिव्यू

डीएमके प्रमुख एम के स्टालिन ने प्रधानमंत्री पद के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की उम्मीदवारी का समर्थन किया है.

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक स्टालिन ने रविवार को विपक्ष के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में राहुल को समर्थन देने का एलान किया.

राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई बड़े नेता चेन्नई स्थित डीएमके मुख्यालय में दिवंगत एम करुणानिधि की प्रतिमा के अनावरण समारोह में शामिल हुए थे.

उसी दौरान डीएमएक प्रमुख ने सभी विपक्षी नेताओं को हैरान करते हुए कहा, "मैं तमिलनाडु की ओर से राहुल गांधी को उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव देता हूं."

अगले साल यानी 2019 में ही आम चुनाव होने हैं. और पांच दिन पहले ही कांग्रेस ने तीन बड़े राज्यों के विधान सभा चुनावों में जीत दर्ज की है. ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कद विपक्ष के नेताओं में बढ़ गया है.

रायबरेली में मोदी का हमला
एनडीए के रक्षा समझौतों में क्वात्रोकी मामा या मिशेल अंकल नहीं थे, इसलिए कांग्रेस "झल्लाई" हुई है और "झूठ" बोल रही है.

ये बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रायबरेली में कही. रफाल सौदे में सुप्रीम कोर्ट की ओर से न्यायिक हस्तक्षेप की मांग को खारिज करने के बाद प्रधानमंत्री ने किसी सार्वजनिक मंच पर पहली बार कुछ बोला है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक तीन राज्यों में हार के बाद पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र पहुंचे नरेंद्र मोदी ने सवाल उठाया कि कारगिल युद्ध के बाद सेना की मांग के बावजूद कांग्रेस ने वायु सेना को मज़बूत क्यों नहीं किया.

मध्य प्रदेश में ईवीएम पर शक, होगी जांच
मध्य प्रदेश के निर्वाचित मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश में सबसे बड़े दल के तौर पर सामने आने बावजूद कांग्रेस का विंध्य क्षेत्र में ईवीएम की विश्वसनीयता पर शक बरकरार है और इस इलाके में हुए वोटिंग पैटर्न की वह विशेषज्ञों से निष्पक्ष जांच कराएगी.

ये खबर जनसत्ता समेत कई अखबारों में है. खबर है कि कमलनाथ सोमवार यानी आज मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं.

प्रदेश में 11 दिसंबर को मतगणना हुई थी. कांग्रेस का इस बार विंध्य इलाके में सबसे खराब प्रदर्शन रहा.

कांग्रेस को वहां 30 में से सिर्फ 6 सीटें हासिल हुईं, जबकि बीजेपी के खाते में 24 सीटें गईं.

मंदिर एनडीए का नहीं बल्कि एक पार्टी का एजेंडा है'
एनडीए में बीजेपी के सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख राम विलास पासवान के बेटे और जमुई से सांसद चिराग पासवान ने कहा कि राम मंदिर एक पार्टी का एजेंडा हो सकता है, ना कि पूरे एनडीए और केंद्र सरकार का.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक उन्होंने कहा कि 2019 के आम चुनाव में बीजेपी विकास के एजेंडे के साथ चुनाव लड़ेगी.

एलजेपी संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि बीजेपी को किसी को भी राम मंदिर और बजरंगबली की जाति जैसे मुद्दों को उठाकर जनता में भ्रम पैदा करने का मौका नहीं देना चाहिए.

पासवान ने कहा, "हमने 10 दिसंबर को हुई एनडीए की मीटिंग में साफ कहा था कि हमें विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ना है.

सबरीमला:ट्रांसजेंडरों के समूह को पुलिस ने लौटाया

सबरीमला मंदिर में पूजा के लिए जा रहे ट्रांसजेंडरों के एक समूह को पुलिस ने मंदिर से 60 किलोमीटर दूर इरूमेली में ही रोककर वापस भेज दिया.

ट्रांसजेंडरों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनको प्रताड़ित किया और कहा कि उनके दर्शन पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इस मुद्दे पर कानूनी स्पष्टता की ज़रूरत है.

हिंदुस्तान अखबार की खबर के मुताबिक दर्शनों के लिए पारंपरिक परिधान काली साड़ी पहनकर चार ट्रांसजेंडर मंदिर जा रहे थे.

उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने अयप्पा मंदिर जाने के लिए उन्हें पुरुषों जैसी पोशाक पहनने को कहा और सुरक्षा देने से भी इनकार कर दिया

Thursday, December 13, 2018

राफेल पर सुप्रीम क्लीन चिट, क्या अब भी राहुल कहेंगे 'चौकीदार चोर है'?

राफेल डील मामले पर सुप्रीम कोर्ट से कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है और मोदी सरकार को राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि राफेल सौदे में कोई संदेह नहीं है. राफेल की गुणवत्ता में पर कोई सवाल नहीं है. हमने सौदे की पूरी प्रक्रिया पढ़ी है. विमान की कीमत देखना हमारा काम नहीं है.

बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल डील मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार सवाल खड़े करते रहे हैं. इतना ही नहीं, राहुल गांधी लगातार चुनावी अभियान में कहा करते थे कि देश का 'चौकीदार चोर' है. इस नारे के जरिए राहुल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल खड़े कर रहे थे.

राहुल गांधी सीधे-सीधे पीएम मोदी को राफेल डील मामले में भ्रष्टाचार करने का आरोप लगा रहे थे. इतना ही नहीं इस डील के जरिए अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने का आरोप खुले आम लगा रहे थे.

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने शुक्रवार को राफेल मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि राफेल सौदे में कोई संदेह नहीं है. राफेल की गुणवत्ता में पर कोई सवाल नहीं है. हमने सौदे की पूरी प्रक्रिया पढ़ी है.

कोर्ट ने केंद्र सरकार ने फ्रांस के साथ हुए 36 लड़ाकू विमान खरीदने के सौदे का बचाव किया है और इनकी कीमत से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग का विरोध किया और कहा कि विमान हमारे देश की जरुरत है.

बताते चलें कि कॉफी विद करण में दीपिका ने RK टैटू पर बयान भी दिया था. उन्होंने कहा था, ''मैंने कभी टैटू हटवाने की नहीं सोची, कभी ऐसा प्लान नहीं किया.'' गौरतलब है कि ब्रेकअप के बाद भी दीपिका-रणबीर अच्छे दोस्त हैं. रणबीर से ब्रेकअप के बाद दीपिका डिप्रेशन में चली गई थीं. तब उनकी जिंदगी में रणवीर सिंह आए.

मध्य प्रदेश में कांग्रेस बहुमत से 2 सीट दूर रही लेकिन सपा-बसपा और निर्दलीयों के समर्थन ने कांग्रेस की सरकार बनने का रास्ता साफ कर दिया. लेकिन मुख्यमंत्री के चुनाव में हो रही देरी ने कांग्रेस को ऐसे दोराहे पर खड़ा कर दिया जहां पर पार्टी की छवि धूमिल हो रही थी. लेकिन गुरुवार रात को सीएम के नाम के ऐलान के साथ तमाम अटकलों पर विराम लग गया. आखिर गांधी परिवार ने कमलनाथ को ही क्यों चुना. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि कमलनाथ एक ऐसे नेता हैं जो इंदिरा गांधी से लेकर राहुल गांधी तक सबके प्रिय रहे हैं.

संजय गांधी के खास मित्र रहे कमलनाथ ने राहुल का भी विश्वला जीत लिया. अगर ऐसा नहीं होता तो अध्यक्ष चुने जाने के सिर्फ 7 महीने बाद ही उन्होंने कमलनाथ को मध्य प्रदेश का अध्यक्ष बनाकर न बेजा होता. ऐसा माना जाता है कि राहुल को यह बात समझ में आ गई थी कि मध्य प्रदेश में शिवराज को हराने का कमाल कमलनाथ ही कर सकते हैं.

Monday, December 10, 2018

उपेंद्र कुशवाहा के इस्तीफ़े से बिहार की राजनीति में क्या बदलेगा?

मोदी सरकार में उनकी हैसियत भले राज्य मंत्री की रही हो, लेकिन एक हक़ीक़त ये भी है कि पिछले कुछ सालों में बिहार की जातिगत राजनीति में उपेंद्र कुशवाहा एक ताक़त के तौर पर उभर कर सामने आए हैं.

इसका अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पिछले कुछ महीनों में एनडीए के सहयोगी दल जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नेता नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी की सरकार की लगातार आलोचना के बाद भी नरेंद्र मोदी-अमित शाह की जोड़ी ने उन्हें बाहर का रास्ता नहीं दिखाया था.

ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि आख़िर उपेंद्र कुशवाहा की राजनीति है क्या और बिहार में उनकी राजनीतिक हैसियत कितनी है? इन दो सवालों के जवाब के बाद इस बात को आंका जा सकता है कि बिहार में यूपीए का दामन थामने के बाद कुशवाहा बिहार की राजनीति को कितना बदल पाएंगे?

इन सवालों की पड़ताल शुरू करने से पहले थोड़ी बात उपेंद्र कुशवाहा और नीतीश कुमार के आपसी रिश्तों की.

थोड़ा पीछे चलते हैं, साल 2003 में, नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा को बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया था. यानी बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री के बाद सबसे ताक़तवर कुर्सी कुशवाहा के पास रही.

नीतीश कुमार के साथ अपने संबंधों को लेकर उपेंद्र कुशवाहा कई बार दोहरा चुके हैं कि वे उन्हें अपना बड़ा भाई मानते रहे हैं. लेकिन 2003 के बाद जब 2005 में नीतीश कुमार पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा से उनका बंगला खाली कराने के लिए उनकी ग़ैरमौजूदगी में उनके घर का सामान तक बाहर फिंकवा दिया.

कुशवाहा आज तक उस बात को नहीं भूल पाए हैं कि जिस शख़्स को बिहार का मुख्यमंत्री बनवाने के लिए वे दिन रात एक करके बिहार के इलाकों में घूम रहे थे, उसने सत्ता आते ही घर में मौजूद उनकी अकेली मां की परवाह नहीं करते हुए घर का सारा सामान सड़कों पर फिंकवा दिया था.

कुशवाहा समता पार्टी से बाहर निकले, राष्ट्रीय समता पार्टी बनाई और अपनी राजनीतिक जमीं बनानी शुरू कर दी, 2009 के लोकसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए थे और इन उम्मीदवारों ने 25 हज़ार से लेकर 40 हज़ार तक वोट हासिल किए.

नीतीश के लिए मुश्किलें
नीतीश कुमार को अंदाज़ा हो गया था कि कुशवाहा उनके लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं लिहाजा कुशवाहा की एक सार्वजनिक सभा में पहुंचकर उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा को गले लगाकर सब शिकायतें दूर करने का भरोसा दिया और कुशवाहा को राज्य सभा में भेज दिया.

कुशवाहा राज्य सभा में आ तो गए लेकिन एक राजनीतिक ताकत के तौर पर उभरने का सपना वे भूल नहीं पाए और 2013 में एक दिन राज्यसभा से इस्तीफ़ा देकर वे फिर से सड़क पर आ गए. अपनी नई पार्टी बनाई राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी के नाम से.

2014 में अपनी ज़ोर-आजमाइश से नरेंद्र मोदी और अमित शाह से मिलकर एनडीए में शामिल हुए और तीन सीटें हासिल कर केंद्र में मंत्री बन गए. तब नीतीश कुमार अकेले थे और लोकसभा चुनाव में उन्हें अपनी ताक़त का अंदाज़ा भी हो गया था. करारी हार से तिलमिलाए नीतीश ने पुरानी दुश्मनी भुला कर लालू प्रसाद यादव से हाथ मिला लिया.