छात्रों का आरोप है कि उनके प्रोफ़ेसर उन पर अभद्र टिप्पणियां करतें हैं. अगर कोई इसका विरोध करने की कोशिश करता है तो वो धमकाने लगते हैं. इनका दावा है कि जो प्रोफ़ेसरों की बात मानता है उसे अच्छे नंबर से पास करते हैं.
ये शिकायतें फाइन आर्ट में अप्लाइड के छात्रों की है. पिछले 14 दिनों से छात्र अप्लाइड आर्ट्स विभाग के विभागाध्यक्ष हफिज़ अहमद के ख़िलाफ़ अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
सोमवार को जामिया मिलिया इस्लामिया के प्रोक्टर ने बताया की छात्रों की शिकायत पर एचओडी को तीन महीने की छुट्टी पर भेज दिया गया है. तब तक के लिए विभागाध्यक्ष का पद किसी और को सौंपा जाएगा.
जामिया मिलिया इस्लामिया के जनसंपर्क अधिकारी और मीडिया संयोजक अहमद अज़ीम ने बताया कि इस मामले के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित कर दी गई है, जिसमें छह विभागों के डीन शामिल हैं. कमेटी से आग्रह किया गया है कि वो दो हफ़्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप दें.
विरोध कर रहे छात्रों की मांग है कि पहले विभागाध्यक्ष को सस्पेंड किया जाए तब जांच की जाए. एचओडी के पद के साथ इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की जा सकती.
सात फ़रवरी को छात्रों ने प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के लिए एक मार्च निकाला था. इस दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों और प्रोफ़ेसर को बचाने वाले छात्रों के बीच काफ़ी झड़प हुई थी, जिसमें कुछ छात्रों को चोट लगी थी.
उस समय अकांक्षा कौशिक वहीं मौजूद थी, जो एमएएफ की छात्र हैं. उनका कहना है, ''इतने दिनों से शांति से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उनके छात्रों ने हमें मारने की कोशिश की. इसमें मुझे चोट लगी और दीपिका भट्ट नाम की लड़की को तो हॉस्पिटल में भर्ती करना पड़ा.''
दीपिका बताती हैं, ''वे पूरे डिपार्टमेंट में इकलौते टीचर हैं और इसलिए वे हिटलरगिरी करते हैं. जैसे सेक्शुअल कॉमेंट्स और मैसेज करना, मार्क्स न देना, सिर्फ़ अपने फेवरेट बच्चों को ही मार्क्स देना.''
''अगर कोई अपना काम समय पर नहीं देता उनसे पूछते हैं कि रात को तीन बजे तक जगकर क्या करती हो. रात भर किससे बात करती हो, एक ही लड़के से बात करती हो या चार लोगों से बात करती हो और अगर तुम दर्द में हो तो सुबह जल्दी आओ मैं तुम्हें योगा या वर्कआउट करना सिखाऊंगा. कुछ लड़कियों को उनकी ही फोटो क्रॉप कर के भेजते हैं.''
बीबीसी से बात करने पर दीपिका भट्ट कांप रही थीं. दीपिका वही लड़की हैं जिन्हें सात फ़रवरी के दिन विरोध प्रदर्शन के दौरान चोट लगी थी.
''उस दिन भी हम विभाग में ही मार्च निकाल रहे थे. रजिस्ट्रार ने हमें आश्वासन दिया कि आपके एचओडी को बदल दिया जाएगा. आप जाकर अपनी क्लास लीजिए. इसलिए हम एचओडी से बात करने गए लेकिन उन्होंने हमसे बात ही नहीं की. उनके फेवरेट स्टूडेंट ने मारपीट शुरू कर दी उस दौरान मेरे साथ बतमीजी भी हुई. मुझे धक्का मारकर गिरा दिया गया और गिराने के बाद वे मुझ पर से चलकर गए. थोड़ी देर बाद में बेहोश हो गई और मुझे हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया.''
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