Thursday, December 27, 2018

सुपर 30 के आनंद कुमार के भाई प्रणव कुमार पर हमला हुआ या हादसा?

फ़िल्म प्रमोशन से जुड़ी चीज़ें बिहार में आनंद कुमार के भाई प्रणव कुमार संभाल रहे थे. लेकिन इन सब के बीच प्रणव कुमार एक 'सड़क हादसे' का शिकार होने के बाद अब यारपुर इलाके के एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं.

आनंद कुमार ने बीबीसी हिंदी को बताया, "एक साज़िश के तहत मेरे भाई को हाइवा (ट्रक) से कुचलने की कोशिश की गई. बाइक से जा रहे प्रणव को हाइवा 12-14 फीट तक घसीटते हुए ले गया. ईश्वर की कृपा थी कि उसकी जान बच गई. वरना तो वो लोग मारने की सोच कर आए थे."

पटना के जक्कनपुर थाने में आनंद कुमार ने एफ़आईआर दर्ज करवाई है.

एफ़आईआर में दर्ज प्रणव के बयान के मुताबिक़, ''टक्कर के बाद ज़ख्मी हालत में जब उन्होंने भाग रहे हाइवा की तस्वीर लेनी चाही तो अचानक चार-पांच लड़कों ने उन्हें तस्वीर लेने से रोका. जैसे ही हाइवा नजरों से ओझल हुई, वो लड़के भी अचानक गायब हो गए."

पुलिस, डॉक्टरों ने क्या कहा?
डॉक्टरों के मुताबिक़, गंभीर रूप से ज़ख्मी प्रणव का दाहिना पैर बुरी तरह फ्रैक्चर है. हालांकि वो अब खतरे से बाहर हैं.

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. जक्कनपुर पुलिस के मुताबिक़, ''पहली नज़र में यह सड़क हादसे जैसा प्रतीत हो रहा है. लेकिन, एफआईआर में दिए अपने बयान में प्रणव ने विद्यानंद नाम के एक व्यक्ति का ज़िक्र करते हुए यह कहा है कि जिन लड़कों ने उन्हें फोटो खींचने से रोका था, उनमें से एक को वह पहचानते हैं जिसे उन्होंने कई बार विद्यानंद के साथ देखा है.''

विद्यानंद आनंद कुमार के कुम्हरार स्थित कोचिंग क्लास के सामने ही एक होस्टल चलाते हैं.

शुरुआत में सड़क दुर्घटना जैसा लग रहा मामला अब पुलिस के लिए पेचीदा बन गया है. पुलिस अब उस शख्स की तलाश में है, जिसका जिक्र एफ़आईआर में है.

जक्कनपुर थाना प्रभारी ने बताया, ''पहले हम लोग उस आदमी तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जिसके बारे में प्रणव ने कहा है. सारे पहलुओं पर जांच के बाद ही ये कहा जा सकता है कि ये रोड एक्सिडेंट नहीं था. फिलहाल यह मामला रोड एक्सिडेंट के रूप में दर्ज है.''

आनंद कुमार का क्या कहना है?
प्रणव पर ये कथित हमला ऐसे वक़्त में हुआ है, जब सुपर 30 बैच में पढ़ने वाले छात्रों की परीक्षा क़रीब है. दूसरा विकास बहल की बनाई फ़िल्म, जिसमें रितिक रोशन आनंद की भूमिका में हैं, जल्द रिलीज़ होने वाली है.

आनंद कहते हैं, "वही भाई ही तो मेरा संबल है. काम का तो छोड़ ही दीजिए, मानसिक रूप से भी आघात पहुंचा है. अभी तक लोगों को मुझसे दुश्मनी थी, मुझे टारगेट करते थे, अब भाई को निशाना बनाया जा रहा है. तीन महीने तक वह चल भी नहीं पाएगा. बच्चों के नोट्स तैयार करवाने से लेकर सारा कुछ तो वही करता है. अब पढ़ाने के सिवा और भी तमाम जिम्मेदारियां मुझे खुद उठानी होंगी."

आनंद इसे सड़क दुर्घटना मानने से साफ इंकार करते हैं.

वो कहते हैं, "सड़क दुर्घटना के समय आस-पास जो लोग मौजूद होते हैं वो ज़ख्मी की मदद करते हैं, मगर यहां भाई को तो पहले फोटो खींचने से रोक दिया और फिर जस का तस छोड़ कर भाग गए. ये सब कुछ एक साजिश के तहत हो रहा है. मैं नाम नहीं लूंगा. सब जानते हैं. पहले मेरे एक स्टाफ को फंसाया गया. वो दो महीने जेल में रहा. और अब वो यहां तक गिर गए कि हम लोगों पर व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं."

हमने जब प्रणव से बात की तो एक नई जानकारी मिली. वो ये कि जिस विद्यानंद का ज़िक्र एफ़आईआर में है, उसके खिलाफ पहले भी उन्होंने कई बार शिकायतें की हैं.

प्रणव ने आरोप लगाया, ''विद्यानंद पहले भी हमारे ख़िलाफ़ बोलते रहे हैं. भैया ने उससे ये सब नहीं करने का कई बार आग्रह किया था. हमने कई बार इसकी सूचना पुलिस को दी है. लेकिन मालूम नहीं पुलिस ने इसे लेकर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की"

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